Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho | तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो – जगजीत सिंह

Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho:

Tum Itanaa Jo Muskuraa Rahy Ho,
Kyaa Ghamm Hai Jisko Chupaa Rahy Ho,

Ankhonn Mein Namii, Hansii Labonn Parr,
Kyaa Haal Haii, kyaa Dikhaa Rahy Ho,

Ban Jayengy Zahar Pitey Pitey,
Yeh Ashk Jo Pitey Jaa Rahy Ho,

Jinn Zakhmonn Ko Waqt Bharr Chalaa Haii,
Tum kyonn Unhenn Chhedey Jaa Rahy Ho,

Rekhaaonn kaa Khel Haii Mukaddarr,
Rekhaaonn Sy Maat Khaa Rahy Ho. .!!

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो | Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho – Jagjit Singh

Tum इतना जो मुस्कुरा रहे हो,
क्या ग़म है जिस को Chhupaa रहे हो,

आँखों में Namii हँसी लबों पर,
क्या Haal है क्या दिखा रहे हो,

बन जाएँगे Zaher पीते पीते,
Yeh अश्क जो पीते जा रहे हो,

जिन ज़ख़्मों को Waqt भर चला है,
Tum क्यूँ उन्हें छेड़े जा रहे हो,

रेखाओं का Khel है मुक़द्दर,
रेखाओं से मात Khaa रहे हो. .!!

Tum Itna Jo Mushkura Rahe Ho – Jagjit Singh

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,
क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो,

आँखों में नमी, हँसी लबों पर,
क्या हाल है, क्या दिखा रहे हो,

बन जायेंगे जहर पीते पीते,
ये अश्क जो पीते जा रहे हो,

जिन जख्मों को वक्त भर चला है,
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो,

रेखाओं का खेल है मुकद्दर,
रेखाओं से मात खा रहे हो. .!!

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