Donon Jahan Teri Mohabbat Mein Haar Ke – Faiz Ahmad Faiz

Donon Jahan Teri Mohabbat Mein Haar Ke:

Donon Jahan Teri Mohabbat Meinn Haar Ky,
Woh Jaa Raha Haii Koyii Shab-E-Ghamm Huzaar Ky,

Veeraan Haii Maikada Khumm-O-Saagarr Udaass Haii,
Tum Kya Gaye Ky Ruth Gaye Diin Bahaarr Ky,

Ikk Fursat-E-Gunahh Milii, Woh Bhii Chaar Diin,
Dekhy Haiin Hum Ny Hausaly Parwar-Digaar Ky,

Duniyaa Ny Tery Yaadd Say Beganaa Karr Diiya,
Tujh Sy Bhii Dil Farebb Haiin Ghamm Rozagaar Ky,

Bhuuly Sy Muskuraa Toh Diye Thy Woh Aaj ‘Faiz’
Matt Puuch Val-Wale Dil-E-Naa-Kardakarr Ky. .!!

– Faiz Ahmad Faiz

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दोनों Jahaan तेरी मोहब्बत में हार के,
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म Guzaar के,

वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र Udaas हैं,
तुम क्या गए कि रूठ गए दिन Bahaar के,

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी Chaar दिन,
देखे हैं Hum ने हौसले पर्वरदिगार के,

दुनिया ने तेरी Yaad से बेगाना कर दिया,
Tujh से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के,

भूले से Muskura तो दिए थे वो आज ‘फ़ैज़’,
Mat पूछ वलवले दिल-ए-ना-कर्दा-कार के. .!!

– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Donon Jahan Teri Mohabbat Mein | दोनों जहान तेरी मोहब्बत में – Faiz Ahmad Faiz

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के,
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैं,
तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के,

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन,
देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के,

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया,
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के,

भूले से मुस्कुरा तो दिए थे वो आज ‘फ़ैज़’,
मत पूछ वलवले दिल-ए-ना-कर्दा-कार के. .!!

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